मस्तूरी ब्लॉक में श्रमदान से जल संरक्षण की अनोखी पहल नदी- नालों पर बोरी बंधान से थम रहा पानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल के “मोर गांव मोर पानी” अभियान को मिल रही है नई ताकत…@

कशिश न्यूज़ | बिलासपुर
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के “मोर गांव मोर पानी” के अभिनव अभियान को मस्तूरी जनपद पंचायत क्षेत्र में ग्रामीणों और मनरेगा मजदूरों का व्यापक सहयोग मिल रहा है। जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए गांव-गांव में श्रमदान कर नालों पर बोरी बंधान बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी अब गांवों में ही रुकने लगा है।
मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत निरतु, कुकदा, बोहारडीह, लोहरसी, कुकुर्दी केरा, रैलहा, जैतपुर, नेवारी, जलसों, बकरकुदा, जुहली, खम्हरिया, मड़ई, सोंठी, पंधी, देवरी, बरेली, कौव्वताल और झलमला सहित कई गांवों में बोरी बंधान का कार्य तेजी से चल रहा है। कई स्थानों पर कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि अन्य गांवों में अभियान लगातार जारी है। इस पहल से किसानों को सिंचाई और ग्रामीणों को निस्तारी सुविधा का बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले बारिश का अधिकांश पानी तेज बहाव के साथ नालों से बहकर निकल जाता था, जिससे गर्मी के दिनों में जल संकट गहराने लगता था। लेकिन अब बोरी बंधान बनने से पानी गांवों में ही संरक्षित हो रहा है। इससे खेतों में नमी बनी रहेगी, भू-जल स्तर सुधरेगा और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। ग्रामीणों का कहना है कि “मोर गांव मोर पानी” अभियान ने लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामूहिक भागीदारी के लिए प्रेरित किया है।
ग्राम कुकदा के हेमंत पटेल ने बताया कि कोसगाई नाला पर बनाए गए बोरी बंधान से कुकदा के अलावा मड़ई और बिटकुला गांव के किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। साथ ही ग्रामीणों और पशुओं के लिए निस्तारी सुविधा बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि यह मॉडल अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों ने इस पहल को सामूहिक श्रमदान और जनसहभागिता का बेहतरीन उदाहरण बताया। गांव के युवाओं, किसानों और मजदूरों ने एकजुट होकर नालों में बोरी बंधान तैयार किए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि हर गांव में इसी तरह छोटे-छोटे जल संरक्षण कार्य किए जाएं तो आने वाले वर्षों में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मस्तूरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जेआर भगत ने बताया कि कलेक्टर संजय अग्रवाल के “मोर गांव मोर पानी” अभियान से प्रेरित होकर पूरे जनपद क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक 17 नालों को बोरी बंधान के लिए चिन्हांकित किया गया है, जिनमें कई स्थानों पर कार्य प्रारंभ हो चुका है और कुछ जगहों पर कार्य पूर्ण भी हो गया है। शासन की मंशा है कि बारिश के पानी को गांवों में ही रोका जाए, ताकि भू-जल स्तर में सुधार हो और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके।
जनपद पंचायत मस्तूरी की कार्यक्रम अधिकारी रुचि विश्वकर्मा ने बताया कि “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत ग्रामीण अब जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। पूरे मस्तूरी क्षेत्र में चिन्हांकित नालों में से 8 नालों पर कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि अन्य स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है।
ग्राम कुकदा के ग्रामीणों का मानना है कि कोसगाई नाला पर किया गया यह बोरी बंधान आने वाले समय में जल संरक्षण की बड़ी मिसाल बनेगा। इससे खेतों की सिंचाई, कुओं और हैंडपंपों के जलस्तर को बनाए रखने के साथ-साथ गर्मी में पेयजल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
बोरी बंधान से गांवों को मिलेंगे ये बड़े फायदे
बोरी बंधान के इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार होगा और वॉटर लेवल गिरने से बचेगा, कुएं, हैंडपंप और तालाब लंबे समय तक पानी से भरे रहेंगे,खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा,ग्रामीणों और पशुओं के लिए निस्तारी सुविधा बेहतर होगी, बारिश का पानी बहने के बजाय गांव में ही संरक्षित रहेगा,गर्मी के मौसम में जल संकट कम होगा। साथ ही किसानों की फसलों के उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।
