21 दिनों से आंदोलन की आग में सुलग रहा है,सीपत का सुखरीपाली, एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की जंग के मैदान में ग्रामीण: 24 सूत्रीय मांगों पर अनिश्चितकालीन धरना जारी…@

आदिवासी भर्ती, राखड़ डैम घोटाले और रोजगार में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा एनटीपीसी प्रबंधन, ग्रामीणों ने दी पूरी तरह से राखड़ परिवहन बंद करने की चेतावनी
अब सिर्फ आश्वासन नहीं, हक चाहिए उग्र आंदोलन के संकेत- रेवा शंकर साहू
कशिश न्यूज | सीपत
ग्राम पंचायत गतौरा के आश्रित ग्राम सुखरीपाली में एनटीपीसी सीपत प्रबंधन के खिलाफ संयंत्र प्रभावित गांव के ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। 24 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीण पिछले 21 दिनों से ठाकुर देव मंदिर के पास अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने एनटीपीसी प्रबंधन पर वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार, स्थानीय युवाओं की उपेक्षा, राखड़ परिवहन में अव्यवस्था और प्रभावित गांवों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय बैठकों में सहमति बनने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रभावित गांवों के लोग आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, बेरोजगार युवक और महिलाएं लगातार डटे हुए हैं।
जनपद सदस्य सेवा शंकर साहू ने कहा कि एनटीपीसी प्रबंधन केवल आश्वासन देकर क्षेत्रवासियों को गुमराह कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित गांवों के आदिवासी और बेरोजगार युवाओं के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। जनपद सदस्य ने कहा, 692 पदों में 152 पद आदिवासियों के लिए आरक्षित होने के बावजूद आज तक भर्ती नहीं की गई। यह सीधे-सीधे प्रभावित परिवारों के अधिकारों का हनन है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और भी उग्र होगा।
सबसे बड़े ग्राम पंचायत गतौरा के सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र वस्त्रकार ने राखड़ डैम में हुए रेजिंग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एनटीपीसी प्रबंधन ने ग्राम पंचायत गतौरा,कौड़िया,रांक व देवरी के लाल गिट्टी से 3 रखड़ डैम 2 वाटर डैम और 9 राइजिंग डैम डाइक और राखड़ डैम निर्माण कराया गया है,इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। क्षेत्र की लाल गिट्टी, कपची और मुरूम का अवैध उपयोग कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया, जबकि प्रभावित गांवों को गौण खनिज मद की राशि से भी वंचित रखा गया, आंदोलनकारियों का कहना है कि एनटीपीसी डेम से उड़ने वाले राखड़ से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर लगातार बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। वहीं दलदल प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिलने और राखड़ रिसाव से खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म होने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर राखड़ परिवहन भी पूरी तरह बंद कराया जाएगा।
आदिवासियों की भर्ती पूरी करने की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एनटीपीसी में 692 पदों में 152 पद आदिवासियों के लिए आरक्षित होने के बावजूद आज तक भर्ती नहीं की गई। प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार देने की मांग तेज हो गई है।
राखड़ डैम रेजिंग में भ्रष्टाचार का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि राखड़ डैम के राइजिंग डैम निर्माण में स्थानीय खनिजों का उपयोग कर फर्जी रॉयल्टी पर्चियों के जरिए करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
राखड़ परिवहन तत्काल बंद करने की चेतावनी
ग्रामीणों का आरोप है कि राखड़ परिवहन में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार हो रहा है। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने तक राखड़ परिवहन बंद कराने की चेतावनी दी गई है।
प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग
डाइक से हो रहे पानी रिसाव और राखड़ से खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म होने का आरोप लगाते हुए किसानों ने तत्काल मुआवजा और स्थायी समाधान की मांग की है।
स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार में प्राथमिकता
ग्रामीणों ने कहा कि प्रभावित गांवों के युवाओं को अनस्किल्ड कार्यों में भी प्राथमिकता नहीं दी जा रही। ठेकेदारों द्वारा पैसों लेकर भर्ती करने का भी आरोप लगाया गया, अटल बाजार सुखरीपाली सड़क और घूमना पुल की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। भारी वाहनों के दबाव से सड़कें टूटने का आरोप लगाया गया है। वही गर्मी में उड़ने वाली राखड़ से ग्रामीणों में बीमारी फैलने की शिकायत करते हुए स्थायी स्वास्थ्य सुविधा और नियमित मेडिकल जांच की मांग की गई है।
