खोंधरा जंगल में ‘जंगलराज’ 9 महीने में 7 चीतलों की मौत, सड़क किनारे पड़ा रहा शव और वन विभाग बेखबर ! सिस्टम पर सवाल…@

रियाज़ अशरफी | सीपत
सीपत क्षेत्र के खोंधरा जंगल में बोइर पड़ाव के पास शुक्रवार को फिर एक नर चीतल मृत अवस्था में मिला। सुबह घूमने पहुंचे पर्यटकों की नजर सड़क से कुछ दूरी पर पड़े चीतल पर पड़ी। पास जाकर देखने पर वह मृत मिला, जिसके बाद पर्यटकों ने तत्काल वन विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और डॉक्टर से पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक तौर पर मौत की वजह कुत्तों का हमला बताया जा रहा है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर चीतल मृत पड़ा था, वहां से वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी लगातार आवाजाही करते हैं, फिर भी उन्हें मृत वन्यजीव नजर क्यों नहीं आया..? इसे विभागीय लापरवाही कहें या जंगल में फैला जंगलराज, पशु प्रेमियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक पिछले 9 महीनों में सीपत, सोंठी और खोंधरा क्षेत्र के जंगलों में कुत्तों के हमले से अब तक 7 चीतलों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद वन विभाग कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। डेढ़ माह पूर्व सोंठी जंगल मे जिस मादा चीतल की मौत हुई थी वह गर्भवती थी।
खोंधरा जंगल बना शिकारियों का सुरक्षित ठिकाना
ग्रामीमो का कहना है कि खोंधरा जंगल में सबसे ज्यादा शिकार की घटनाएं होती हैं। कोरबा, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा समेत आसपास के क्षेत्रों से शिकारी यहां पहुंचते हैं। रात के अंधेरे में खुलेआम बंदूक लेकर जंगल में घुसना और चीतल,कोटरी,जंगली सुअर सहित कई जानवरो का शिकार कर आसानी से वहां से निकल जाना शिकारियों के लिए आम बात हो गई है।
बताया जा रहा है कि यहां वर्षों तक पदस्थ रहे एक चर्चित डिप्टी रेंजर का हाल ही में तबादला हुआ है, लेकिन उनकी पकड़ अब भी बनी हुई है। वर्तमान में पदस्थ नए डिप्टी रेंजर की नियुक्ति भी उन्हीं के इशारे पर होने की चर्चा क्षेत्र में है। सूत्र बताते हैं कि पूर्व डिप्टी रेंजर के खिलाफ कई विभागीय जांच चल रही हैं, बावजूद इसके हर सत्ता में पैठ बनाकर वे वर्षों तक यहां जमे रहे,और जंगलराज चलाते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि नए डिप्टी रेंजर और वर्षों से जमे बिट गार्ड जंगल में शायद ही कभी नजर आते हैं, जिसका फायदा शिकारी खुलेआम उठा रहे हैं।
जंगल में पानी नहीं, इसलिए बस्ती की ओर आते हैं वन्यजीव
सैकड़ों एकड़ में फैले बिलासपुर रेंज के इस बड़े जंगल में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। गर्मी बढ़ने के साथ चीतल, कोटरी समेत अन्य वन्यजीव पानी की तलाश में गांवों और बस्तियों के आसपास बने तालाब, डबरी और नालों तक पहुंच जाते हैं। वहीं पहले से घात लगाए आवारा कुत्ते उन पर हमला कर देते हैं।
कई मौतों का राज जंगल में ही दफन!
ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल में कई वन्यजीवों का शिकार करंट लगाकर या बंदूक से किया जा रहा है, ज्यादातर चीतल का शिकार कुत्तों के हमले से भी हो रहा लेकिन अधिकांश मामले सामने ही नहीं आ पाते। जो घटनाएं आम लोगों की नजर में आ जाती हैं, उनमें विभाग पोस्टमार्टम कर औपचारिकता पूरी कर देता है, जबकि कई मामलों को जंगल में ही दफन कर दिया जाता है।
मामले में खोंधरा सर्किल के नवपदस्थ डिप्टी रेंजर नागेंद्र दत्त मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
