“यहां रहा तो जी नहीं पाऊंगा…” मां को लिखा आखरी संदेश, सीवी रमन यूनिवर्सिटी का छात्र रहस्यमय तरीके से लापता, 7 दिन तक खामोश रहा प्रबंधन, अब उठ रहे गंभीर सवाल…?

कशिश न्यूज़ |बिलासपुर
शहर से लगे कोटा स्थित डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 19 वर्षीय छात्र के रहस्यमय तरीके से लापता होने के मामले ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि छात्र के गायब होने की घटना सामने आने में पूरे सात दिन लग गए, जिससे अब विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं।

जानकारी के मुताबिक बिहार के गया जिले के महावीर कॉलोनी संगम चौक निवासी अमरेंद्र कुमार का पुत्र रोहित कुमार (19) विश्वविद्यालय में बी-फार्मा तृतीय सेमेस्टर का छात्र था और छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिजनों के अनुसार रोहित 5 मार्च से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी जानकारी परिवार को 6 मार्च की रात करीब 10:30 बजे दी।

परिवार का आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर सूचना भी नहीं दी। जब परिजन विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्हें पता चला कि रोहित का अपने सहपाठी पंकज के साथ करीब 5 हजार रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इस विवाद के बाद उसके साथ मारपीट भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना देना जरूरी नहीं समझा।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि छात्रावास में रहने वाला छात्र अचानक लापता हो जाता है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती। परिजनों का कहना है कि रोहित की उपस्थिति और अनुपस्थिति को लेकर भी प्रबंधन स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा है। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तक परिवार को नहीं दिखाई जा रही है, जिससे मामला और संदिग्ध होता जा रहा है।

परिजनों ने 5 मार्च के उपस्थिति रजिस्टर में रोहित के नाम के सामने किए गए हस्ताक्षर को भी संदिग्ध बताया है और उसकी लिखावट की जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि छात्र उस दिन मौजूद नहीं था तो रजिस्टर में हस्ताक्षर कैसे दर्ज हो गए।
मामले को और रहस्यमय बनाता है रोहित का वह संदेश, जो उसके मोबाइल से उसकी मां के नाम भेजा गया था, “यहां रहूंगा तो जी नहीं पाऊंगा…” हालांकि तकनीकी कारणों से यह संदेश उसकी मां तक पहुंच नहीं पाया। रोहित का मोबाइल फोन भी उसके छात्रावास के कमरे से ही बरामद हुआ है।
छात्र के पिता सहित परिजनों ने गुरुवार को बिलासपुर एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि छात्र की गुमशुदगी या संभावित अपहरण का मामला दर्ज कर उसके सहपाठी पंकज सहित अन्य लोगों से कड़ी पूछताछ की जाए और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका की भी बारीकी से जांच हो।
पुलिस के अनुसार 7 मार्च को गुम इंसान प्रकरण क्रमांक 29/2026 दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि रोहित 6 मार्च की शाम करीब 4 बजे छात्रावास से लापता हुआ था। छात्रावास प्रभारी की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।
जांच के दौरान छात्रावास के कमरे से एक मोबाइल फोन (बिना सिम), ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े नोट्स वाला एक पन्ना और एक नोटबुक बरामद हुई है। नोटबुक में करीब 40 लाख 77 हजार 400 रुपये के लेन-देन का हिसाब दर्ज मिला है। पुलिस के अनुसार रोहित ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में सक्रिय था और कई लोगों से पैसों का लेन-देन करता था।
बैंक खातों की जांच में करीब 7 लाख रुपये के लेन-देन भी सामने आए हैं। पुलिस ने छात्रावास के छात्रों, मित्रों और परिचितों से पूछताछ की है तथा कॉल विवरण, बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। इसके अलावा आसपास के कई स्थानों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए हैं। डॉग स्क्वाड की मदद से छात्रावास से लेकर कोंटा रेल्वे स्टेशन तक तलाश की गई है। विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है।
फिलहाल छात्र का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रबंधन की लापरवाही के कारण एक छात्र की जिंदगी खतरे में पड़ गई..? सवाल यह है कि अगर छात्र 5 मार्च से लापता था तो प्रबंधन सात दिन तक चुप क्यों रहा..? अब देखना होगा कि पुलिस जांच में सच्चाई कब सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
