बिलासपुर

मध्यप्रदेश शासन में बने स्वास्थ्य विभाग का स्टॉफ क्वार्टर अब खंडहर में तब्दील, हॉस्पिटल के कर्मचारी किराये के मकानों में रहने को मजबूर

मकान के खिड़की दरवाजे तक उखाड़ ले गए चोर,लाखों के सरकारी संपत्ति बदहाली की शिकार

काशिश न्यूज | सीपत

सरकारी संपत्तियों को नजरअंदाज करना किस तरह लाखों रुपये के सार्वजनिक निवेश को बर्बाद कर सकती है, इसका ताजा उदाहरण शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीपत परिसर के सामने बने स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ क्वार्टर हैं। मध्यप्रदेश शासन के कार्यकाल में वर्ष 1994-95 के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के आवास के लिए निर्मित तीन स्टाफ क्वार्टर आज देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गया हैं।

हॉस्पिटल स्टाफ की जर्जर भवन

करीब ढाई दशक तक इन क्वार्टरों में डॉक्टर, नर्स, कंपाउंडर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी निवास करते हुए क्षेत्र के लोगों की सेवाएं की है। 25 साल बाद वर्ष 2020 में अस्पताल परिसर के भीतर ही दो मंजिला नए स्टाफ क्वार्टर बनने के बाद पुराने भवन खाली हो गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इनकी ओर ध्यान नहीं दिया, जिससे महज पांच वर्षों में ही लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति जर्जर अवस्था में पहुंच गई। भवनों में लगे खिड़की-दरवाजे, लोहे के एंगल, ग्रिल और अन्य सामग्री असामाजिक तत्वों द्वारा उखाड़ ली गई। अब इन क्वार्टरों की टूटी दीवारें, उखड़े दरवाजे और वीरान परिसर विभागीय उदासीनता की गवाही दे रहे हैं।

मकान के खिड़की दरवाजे भी उखाड़ ले गए चोर

आवास नहीं, इसलिए कर्मचारी किराये के मकानों और शहर से अप-डाउन पर निर्भर

शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्तमान में भी कर्मचारियों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर, कई नर्स और स्वास्थ्यकर्मी सीपत में निजी मकान किराये पर लेकर रह रहे हैं, जबकि कुछ कर्मचारी प्रतिदिन बिलासपुर से 20 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर ड्यूटी करने सीपत पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इन पुराने क्वार्टरों का जीर्णोद्धार कराया गया होता तो उन्हें फिर से उपयोग में लाया जा सकता था जिससे कर्मचारियों की आवासीय समस्या काफी हद तक दूर हो सकती थी। लेकिन अब यह संभव नहीं है क्योंकि मकान के नाम पर अब वहां छत के साथ सिर्फ ढांचा खड़ा है।

मरम्मत के लिए भेजे गए प्रस्ताव, मंजूरी का इंतजार

मस्तूरी के विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल सिंह ने बताया कि यहां स्टाफ क्वार्टरों की कमी है। पुराने क्वार्टरों की मरम्मत और पुनर्विकास के लिए कई बार उच्च स्तर पर प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। समय रहते मरम्मत हो जाने पर भवन उपयोग में आजाते लेकिन अब वह पूरी तरह अनुपयोगी हो गई हैं।

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