जेवरा जंगल में सागौन तस्करी का बड़ा खुलासा: 5 आरोपी गिरफ्तार, पिकअप सहित 2.21 लाख की जब्ती, वन अमले की भूमिका पर उठे सवाल…@

सोंठी–जेवरा बैरियर होते हुए भी कीमती वन संपदा हो रहे है पार
कशिश न्यूज | सीपत
सीपत थाना पुलिस ने जेवरा जंगल क्षेत्र में सागौन लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी जेवरा सर्किल के नवापारा जंगल बिट से सागौन के पेड़ों की कटाई कर पिकअप वाहन में भरकर जांजगीर की ओर ले जा रहे थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन सहित 5 तस्करों को पकड़ लिया है।

पुलिस के अनुसार 26 फरवरी, गुरुवार की रात सूचना मिली थी कि ग्राम जेवरा जंगल क्षेत्र में कुछ लोग सागौन लकड़ी काटकर पिकअप क्रमांक CG-11 AB-0612 में भरकर परिवहन कर रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद थाना सीपत से टीम गठित कर मौके पर रवाना किया गया। घेराबंदी के दौरान संदिग्ध वाहन को रोका गया। तलाशी लेने पर पन्नी से ढंकी 16 नग सागौन लकड़ी बरामद हुई।
मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में रामचंद कुर्रे (41) निवासी बिरगहनी, संतोष कुमार (50) निवासी बिरगहनी, जय सिंह ओगरे (62) निवासी ठरगा बहरा, लिल्लू राम पटेल (56) निवासी महुदा तथा रघुवीर सिंह मरावी (40) निवासी महुदा थाना बलौदा जिला जांजगीर-चांपा शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 16 नग सागौन लकड़ी (कीमत 65,827 रुपए), एक डीजल आरा मशीन व ब्लेड (कीमत 6,000 रुपए) तथा पिकअप वाहन (कीमत 1,50,000 रुपए) जब्त किया है। जब्त सामग्री की कुल कीमत 2,21,827 रुपए आंकी गई है। आरोपियों के विरुद्ध अवैध कटाई एवं चोरी का मामला दर्ज कर शुक्रवार को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। सीपत पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध लकड़ी तस्करों में हड़कंप मचा है। वहीं, क्षेत्र के लोग अब विभाग से वन संपदा की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
ग्रामीणों की सतर्कता से बची वन संपदा
घटना में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका अहम रही। बताया जा रहा है कि जंगल क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर ग्रामीण पहले से सतर्क थे। रात में पेड़ काटने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने आपस में सूचना साझा की और तत्काल पुलिस को अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सूचना नहीं दी जाती तो बड़ी मात्रा में सागौन लकड़ी बाहर खपाई जा सकती थी। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में अवैध कटाई की गतिविधियों को लेकर शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
सोंठी–जेवरा बैरियर और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना के बाद सोंठी–जेवरा बैरियर की निगरानी व्यवस्था और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब जंगल से लकड़ी बाहर लाई जा रही थी तो बैरियर पर सख्त जांच क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि निगरानी में ढिलाई या संभावित मिलीभगत की जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि जंगल क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी की जिम्मेदारी वन अमले की होती है, लेकिन पर्याप्त पेट्रोलिंग नहीं होने से जेवरा–खोंधरा के घने जंगलों में इमारती पेड़ों की अवैध कटाई बढ़ रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगल क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, सोंठी–जेवरा बैरियर पर 24 घंटे सख्त जांच व्यवस्था लागू की जाए, सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
दूसरे दिन ठूठ गिनने पहुंचे कर्मचारी, अधिकारी रहे नदारद
इतनी बड़ी घटना के बाद भी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के घटना स्थल निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी है। दूसरे दिन सोंठी सर्किल के डिप्टी रेंजर भोजराम खूंटे, बिट गार्ड रविंद्र महिलांगे और जितेंद्र सोनवानी सहित जंगल चौकीदार घटना स्थल पर कटे हुए पेड़ों के ठूठ गिनने पहुंचे, जबकि उच्च अधिकारी मौके पर नजर नहीं आए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके का निरीक्षण करते और निगरानी तंत्र मजबूत होता, तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता था।



