बिलासपुर

मानवता की मिसाल बना काव्यांजलि सेवाश्रम,121 बेसहारों को कंबल से राहत, बेजुबान पशुओं की सेवा और 11 हजार पेड़ों से रची हरियाली की कहानी…@

कशिश न्यूज़ | सीपत

कड़ाके की ठंड में जब सड़क किनारे जिंदगी सिमट सी जाती है, तब काव्यांजलि सेवाश्रम सीपत, मानवता की लौ बनकर सामने आता है। सेवाश्रम द्वारा सीपत से बिलासपुर होते हुए महामाया मंदिर रतनपुर तक सड़क किनारे ठंड में जीवन बिताने वाले 121 जरूरतमंदों को कंबल का वितरण किया गया। यह सिर्फ कंबल वितरण नहीं, बल्कि संवेदना, समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का सशक्त संदेश है।

काव्यांजलि सेवाश्रम सीपत के संस्थापक शिव कुमार बर्मन ने बताया कि यह संस्था आज सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। संस्था न केवल बेसहारा लोगों की मदद कर रही है, बल्कि पशु सेवा और पर्यावरण संरक्षण को भी अपने कार्यों का मजबूत आधार बना चुकी है।

पशु सेवा की अनूठी पहल, बेजुबान भी सुरक्षित

काव्यांजलि सेवाश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी सेवा मानव तक सीमित नहीं है। संस्था द्वारा लावारिस और बेजुबान पशुओं के लिए विशेष सेल्टर बनाया गया है, जहां उन्हें सुरक्षित आश्रय मिलता है।
सड़क दुर्घटनाओं में घायल गौमाताओं को सेवाश्रम की गौशाला में लाकर इलाज कराया जाता है। समय पर उपचार, देखभाल और संरक्षण के चलते कई गौमाताओं को नया जीवन मिला है। यह पहल बताती है कि सेवाश्रम के लिए सेवा का अर्थ सिर्फ दान नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति करुणा है।

हरियाली का संकल्प लिया और 11,000 पेड़ों से बदली तस्वीर

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी काव्यांजलि सेवाश्रम का योगदान उल्लेखनीय है। संस्था द्वारा अब तक 11 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिन में से ज्यादातर पौधे जो आज पेड़ों का रूप ले चुके हैं। हर वर्ष बरसात के मौसम में नए पौधरोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जाती है। सेवाश्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक संरक्षित करना है,और इसमें संस्था सफल भी रही है।

सेवा की रीढ़, संस्थापक और टीम

सेवाश्रम सीपत के संस्थापक शिव बर्मन, जो एनटीपीसी में कार्यरत हैं, ड्यूटी के बाद भी समाज सेवा में सक्रिय रहते हैं। उनके मानवतावादी कार्यों को देखते हुए एनटीपीसी द्वारा वर्ष 2024 में “मानवता सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सेवा अभियान वर्ष 2021 से निरंतर चल रहा है। उनके साथ इस पुनीत कार्य में चंद्र कुमार रजक, राजू रजक, शंकर सिदार, बालचंद भोई, सिकंदर भोसले, राहुल निर्मलक जैसे सेवाभावी साथी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वहीं एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी एस.सी.गट्टानी (जीएम), ए.के. सिंह (डीजीएम), विकास कंसल (डीजीएम), श्रीकरन (सीनियर मैनेजर) का निरंतर मोरल सपोर्ट संस्था को मिलता रहा है।

सेवा से जुड़ने का खुला आमंत्रण

काव्यांजलि सेवाश्रम सीपत से लगातार लोग जुड़ रहे हैं। जो भी व्यक्ति मानव सेवा, पशु संरक्षण और पर्यावरण बचाने जैसे पुनीत कार्यों में भागीदार बनना चाहता है, उसके लिए सेवाश्रम एक बेहतर और भरोसेमंद मंच है। काव्यांजलि सेवाश्रम सीपत आज एक संस्था नहीं, बल्कि संवेदना, सेवा और संस्कारों की जीवंत पहचान बन चुका है।

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