टेक्नोलॉजी

12 किमी में 14 जानलेवा ब्रेकर: सीपत बिलासपुर की सड़क बनी बीमारी और हादसों की फैक्ट्री…@

धूल-धक्कड़ से दम घुट रहा, दर्जनों घायल, एक मौत फिर भी प्रशासन संतुष्ट

कशिश न्यूज़ | सीपत

सीपत – बिलासपुर मार्ग में सड़क सुरक्षा के नाम पर किया गया प्रयोग अब आम जनता की सेहत और जान पर भारी पड़ने लगा है। सीपत के नवाडीह चौक से लेकर मोपका के चिल्हाटी मोड़ तक महज 12 किलोमीटर की दूरी में 14 रम्बल स्ट्रिप (ज़ेब्रा) स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं, वो भी बिना किसी मानक, पेंट और चेतावनी बोर्ड के। इसका नतीजा हादसे, धूल, बीमारी और प्रशासनिक उदासीनता के रूप में लोगो के सामने है।

मोपका के चिल्हाटी मोड़ के पास के ब्रेकर

महीने भर पहले ही इन ब्रेकरों का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने जिला सुरक्षा समिति के अगुवाई में किया है, इसके बाद से सड़क हादसों में तेजी से इजाफा हुआ है। दर्जनों लोग गिरकर घायल हो चुके हैं, जबकि दो गंभीर मामलों में सीपत थाना में अपराध दर्ज हुई, जिनमें एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इसे सुरक्षा उपाय का कारण बताकर पल्ला झाड़ रहा है।

धूल का जहर, सांसों पर वार

स्थानीय लोगों के अनुसार, कोयला, राखड़, गिट्टी और अन्य सामग्री से लदे भारी वाहन जब इन ब्रेकरों से गुजरते हैं, तो जबरदस्त उछाल के साथ धूल का गुबार उठता है। यह धूल दिनभर दुकानों, घरों और लोगों के फेफड़ों में भर रही है। और लोग बीमार होकर अस्पताल का चक्कर लगा रहे है।

दिन में 7 बार सफाई, फिर भी धूल कायम

नवाडीह चौक स्थित श्रीराम मेडिकल स्टोर के संचालक राजेश केवट बताते हैं की दिन में 5 से 7 बार दुकान की साफ करनी पड़ती है। इसके बाद भी काउंटर और दवाइयों पर धूल जम जाती है। स्टाफ को मास्क पहनकर काम करना पड़ रहा है। एलर्जी, सांस और अस्थमा के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।

गर्द गुबार से व्यापार भी बेहाल

सीपत के होटल संचालक सौरभ शुक्ला कहते हैं खाने-पीने की सामग्री हमेशा ढककर रखनी पड़ती है। ग्राहक धूल देखकर असहज हो जाते हैं। सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। अगर वक्त रहते इन ब्रेकरों को नही हटाया गया था। व्यापार पर और भी ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।

नए राहगीरों के लिए ‘सरप्राइज ब्रेकर, महिला आरक्षक भी गिरकर घायल

रम्बल स्ट्रिप ब्रेकरों पर न तो सफेद पट्टी है, न रिफ्लेक्टर, न ही कोई संकेतक बोर्ड। बाहर से आने वाले वाहन चालकों को ब्रेकर अचानक नजर आते हैं, जिससे तेज ब्रेक लगते हैं और दुर्घटना की नौबत बनती है। 3 दिन पहले ही महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक प्रियंका शुक्ला में पंधी के ब्रेकर में ड्यूटी जाते समय स्कूटी से गिरकर घायल हो गई है।

थाना क्षेत्र बंटा, जिम्मेदारी बंटी,लेकिन समाधान शून्य

सीपत थाना क्षेत्र में लगभग 6 किमी सड़क आती है, जहां दर्जनों हादसे हो चुके हैं। वहीं लगड़ा ताल से मोपका तक का हिस्सा सरकंडा थाना क्षेत्र में आता है। हादसे हो रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में शिकायत तक दर्ज नहीं हो पा रही।

प्रशासन का जवाब,सब तय योजना के तहत

इस पूरे मामले पर लोकनिर्माण विभाग बिलासपुर संभाग क्रमांक 1 के कार्यपालन अभियंता सीएस विंध्यराज सिंह का कहना है की सीपत-मोपका मार्ग पर बने रम्बल स्ट्रिप ब्रेकर जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में तय किए गए थे। ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर हादसे कम करने के उद्देश्य से इन्हें बनाया गया है।”

लोगो का सवाल…

अगर ये ब्रेकर सुरक्षा के लिए हैं, तो,बिना मानक और बिना संकेतक क्यों..? हादसे कम होने के बजाय बढ़ क्यों रहे हैं..? धूल और बीमारी की जिम्मेदारी कौन लेगा..? मौत के बाद भी सुधार क्यों नहीं..?

कलेक्टर–एसपी को ज्ञापन देने की तैयारी में व्यापारी

ब्रेकर की वजह से धूल डस्ट और हादसों से परेशान सीपत के व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को ज्ञापन सौंपेंगे। जिसमे गैर-मानक ब्रेकर हटाने और हादसों को रोकने के कई जनहित मुद्दे होंगे।

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