जनसंघ से भाजपा तक की यात्रा करने वाले वरिष्ठ स्तंभ बल्दाऊ प्रसाद गुप्ता नहीं रहे – क्षेत्र ने खोया एक समर्पित सेवक…@

✍️ प्रस्तुति – रियाज अशरफी
भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ताओं में से एक, बल्दाऊ प्रसाद गुप्ता जी का सोमवार रात 7 बजे नवरात्रि के पहले दिन 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका निधन सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। वे न केवल राजनीति के क्षेत्र में बल्कि समाजसेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक भी थे।

जन्म और प्रारंभिक जीवन
बल्दाऊ प्रसाद गुप्ता जी का जन्म 26 सितम्बर 1938 को ग्राम गुड़ी (सीपत) में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय श्री ईश्वरदत्त गुप्ता गांव के सरपंच एवं मालगुजार थे। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने समीपवर्ती ग्राम नरगोड़ा में प्राप्त की, जबकि हायर सेकेण्ड्री की शिक्षा उन्होंने बिलासपुर में पूरी की।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
राजनीति में उनकी यात्रा की शुरुआत 1957 में भारतीय जनसंघ से हुई। एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और धीरे-धीरे संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। उन्होंने सीपत मण्डल में अध्यक्ष पद पर भी कार्य किया और भाजपा के गठन के बाद दो बार मण्डल अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला।
समर्पित जनसेवक
बल्दाऊ प्रसाद गुप्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए कार्य किया। 1990-92 में ग्राम गुड़ी के सरपंच निर्वाचित हुए। इस दौरान उन्होंने ग्रामवासियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया। उन्होंने नेत्र शिविर का आयोजन कर 300 से अधिक गरीबों को निःशुल्क चिकित्सा, चश्मे, भोजन व आवास की सुविधा प्रदान की।
किसानों के सच्चे हमदर्द
1996 में वे जिला भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य तथा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने किसानों की समस्याओं को जिला स्तर से लेकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया। उनका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाना रहा।
शिक्षा और संस्कृति के संवाहक
बल्दाऊ गुप्ता जी का स्पष्ट मत था कि “संस्कृति और शिक्षा” को साथ लेकर चलना चाहिए। उनका सपना था कि शिक्षा के क्षेत्र में समाज को आगे ले जाकर नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का बीजारोपण किया जाए। वे मानते थे कि यही हमारी असली धरोहर है।
पारिवारिक जीवन
अपने जीवन में वे एक आदर्श पारिवारिक पुरुष भी रहे। उनका जीवन पत्नी श्रीमती अन्नपूर्णा गुप्ता , पुत्र राधेश्याम गुप्ता और रामशरण गुप्ता, पुत्री गायत्री गुप्ता, शीतला, प्रतिभा और शारदा गुप्ता के साथ प्रेम, स्नेह और सामाजिक सेवा में समर्पित रहा।
एक प्रेरक संदेश
बल्दाऊ प्रसाद गुप्ता जी का जीवन एक संदेश है,जाति-धर्म से ऊपर उठकर समाज व देश के लिए कार्य करें, मिलजुलकर रहें और भारत माँ की रक्षा करें। उन्होंने हमेशा एकजुटता, राष्ट्रसेवा और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी।
क्षेत्र में शोक की लहर
उनके निधन से सम्पूर्ण सीपत क्षेत्र में शोक की लहर है। भाजपा के नेता, कार्यकर्ता, ग्रामीणजन एवं सामाजिक संगठन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। वे केवल एक राजनेता नहीं, एक विचारधारा, एक संस्कार और एक समर्पित कर्मयोगी थे।

बल्दाऊ प्रसाद गुप्ता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि
बलदाऊ प्रसाद गुप्ता जी का जीवन हमारे लिए प्रेरणा रहेगा। उनके निधन से न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि सामाजिक चेतना को भी अपार क्षति हुई है। वे एक युग पुरुष थे जिन्होंने अपने विचार, सेवा और कर्म से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।



