क्राइम

तेज बहाव में मासूम तेजस बहा, 6 घंटे की रेस्क्यू के बाद कार तो मिली लेकिन 36 घंटे बाद भी तेजस का कुछ पता नहीं…@

नाले में डूबी वेगनआर को ग्रामीणों और डीआरएफ टीम ने बाहर निकाला, मासूम की तलाश में आज फिर चलेगा सर्च ऑपरेशन

कशिश न्यूज़ | सीपत

हरेली के दिन हुई दिल दहला देने वाली घटना में झलमला के तुंगन नाले में वेगनआर कार के साथ बहे मासूम तेजस साहू (3.5 वर्ष) का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। शुक्रवार सुबह से शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में डीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों की मदद से 6 घंटे की मशक्कत के बाद कार को नाले से लगभग 300 मीटर दूर बाहर तो निकाल लिया, लेकिन मासूम तेजस कार में नहीं मिला। तेज बारिश और घटती रोशनी के कारण शुक्रवार शाम रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। आज यानी शनिवार से एक बार फिर तेजस की तलाश में रेस्क्यू टीम नाले में उतरेगी।

मासूम तेजस अपने पिता व बड़ी बहन के साथ

कार पानी में तैरती रही, जान बचाने डिक्की से निकले लोग

ग्राम खम्हरिया निवासी मोहनलाल उर्फ भोला साहू (29) गुरुवार को अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ हरेली पर्व पर दर्शन कर लौट रहे थे। कार में कुल 9 लोग सवार थे जिसमें 4 बड़े और 5 बच्चे शामिल थे। झलमला और उच्चभट्ठी के बीच लगातार बारिश के कारण तुंगन नाले की पुलिया के ऊपर करीब 4 फीट पानी बह रहा था। मोहनलाल ने जोखिम उठाते हुए पुल पार करने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव में कार बह गई। कार की आगे की सीट पर बैठे मनोज साहू ने बताया कि जैसे ही कार पुल के बीच पहुंची, पानी का बहाव इतना तेज था कि कार तैरने लगी। गेट नहीं खुले, कांच तोड़ने की कोशिश नाकाम रही। आखिरकार डिक्की खोलकर सभी बाहर निकले और पेड़ों की टहनियों का सहारा लेकर जान बचाई। इस दौरान तेजस को भी पकड़ लिया गया था, लेकिन तेज बहाव में वह हाथ से छूट गया और कार के साथ बह गया।

तुंगन नाला में रेस्क्यू करते टीम व ग्रामीण

तेजस की तलाश में लगे जनप्रतिनिधि व अधिकारी, परिजनों को बंधाया ढांढस

घटना की सूचना मिलते ही डीआरएफ टीम के साथ जनपद पंचायत अध्यक्ष सरस्वती सोनवानी, जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र धीवर, सीपत तहसीलदार सोनू अग्रवाल, थाना प्रभारी गोपाल सतपथी, जनपद सदस्य देवेश शर्मा, झलमला सरपंच धनलाल साहू मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों में सहयोग किया। तेजस की तलाश अब चुनौतीपूर्ण हो चुकी है, क्योंकि तुंगन नाला 8 किमी दूर खारून नदी में मिलता है और वहीं से आगे अरपा नदी से भी जुड़ जाता है। नाले के सभी एनीकट गेट खुले होने और लगातार बारिश के कारण जल स्तर बढ़ता जा रहा है, जिससे तेजस की तलाश और मुश्किल हो गई है।

गहरे पानी से कार को बाहर निकालते ग्रामीण

1994 में बनी पुलिया, हर साल बनती है आफत,ग्रामीणों ने बड़ी पुल की मांग की

ग्रामीणों ने बताया कि जिस पुलिया से यह हादसा हुआ, वह 1994-95 में बनी थी। हर वर्ष बारिश के मौसम में यह पानी में डूब जाती है, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क टूट जाता है। मौके पर पहुंचे सीपत तहसीलदार सोनू अग्रवाल से ग्रामीणों ने बड़ी पुल बनाने की मांग की। तहसीलदार ने आश्वस्त किया कि वे शासन को इस विषय में जरूर अवगत कराएंगे।

घटना स्थल पर ग्रामीणों की भिंड

हादसे की सीमा बेलतरा तहसील की, फिर भी सीपत तहसीलदार ने निभाई ज़िम्मेदारी

हादसा भले ही बेलतरा तहसील के उच्चभट्ठी क्षेत्र का हो, लेकिन न तो बेलतरा तहसीलदार और न ही पटवारी मौके पर पहुंचे। इसके उलट सीपत तहसीलदार सोनू अग्रवाल ना सिर्फ दिनभर वहां मौजूद रहे बल्कि पीड़ित परिवार को ढांढस भी बंधाया। लोगों ने तहसीलदार के इस मानवीय संवेदना और तत्परता की सराहना की।

घटना स्थल पर मौजूद जनप्रतिनिधि व अधिकारी

पंचायत क्षेत्र नहीं फिर भी दिनभर जुटे रहे झलमला के सरपंच और ग्रामीण

यह घटना भले ही झलमला ग्राम पंचायत क्षेत्र से बाहर की हो, लेकिन मानवीयता की मिसाल पेश करते हुए झलमला पंचायत के सरपंच धनलाल साहू के नेतृत्व में पूरी पंचायत टीम दिनभर रेस्क्यू ऑपरेशन में डटी रही। गांव के पंच हैदर अली, शेरखान, लालू साहू, कल्लू यादव समेत दर्जनों ग्रामीणों ने नाले की तलाशी में सहयोग किया। वहीं गांव के अनिल साहू ने बिना किसी आग्रह के अपनी दो जेसीबी मशीनें मौके पर भेज दीं, जिससे रेस्क्यू में गति आई।

अब भी उम्मीद बाकी है… तेजस की सलामती के लिए गांव से लेकर प्रशासन तक जुटा है पूरा तंत्र

तेजस साहू की सलामती को लेकर गांव वालों से लेकर अधिकारी तक हर कोई चिंतित है। लगातार बारिश, उफनता नाला और तेज बहाव के बीच एक मासूम की तलाश अब नदी-नालों के विस्तृत क्षेत्र में की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तेजस की तलाश के लिए शनिवार को और बड़े स्तर पर सर्च अभियान चलाया जाएगा। डीआरएफ की टीमों के साथ अब गोताखोरों की भी मदद ली जाएगी।

मासूम तेजस साहू की फ़ोटो

यह सिर्फ एक हादसा नहीं, वर्षों से लटके विकास के इंतज़ार की सच्चाई है

तुंगन नाले की जिस पुलिया से यह हादसा हुआ, वह 30 साल पुरानी है। हर बारिश में गांवों का संपर्क टूटता है, और अब यह पुलिया एक मासूम की ज़िंदगी निगल गई। यह हादसा एक चेतावनी है सिर्फ तेजस के लिए नहीं, बल्कि हर उस गांव के लिए जो इस पुल पर भरोसा करके अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

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