राजनीति

उम्मीदों पर संगठन का ब्रेक, भाजपा पुनर्गठन में मस्तूरी को “शून्य”, कुर्सियाँ कोटा–बेलतरा में सिमटीं क्या विधायक न होने की सज़ा भुगत रही है यह विधानसभा…@

महिला मोर्चा की कुर्सी भी कोटा को सौंपकर संगठन ने मस्तूरी के अध्याय पर लिख दिया “The End”

सवाल..सबसे बड़ी विधानसभा, सबसे बड़ी उपेक्षा! भाजपा संगठन में मस्तूरी को क्यों नहीं मिला हक़..?

कशिश न्यूज़ | बिलासपुर

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन में इस बार सबसे बड़ा झटका मस्तूरी विधानसभा को लगा है। संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से बिलासपुर जिले को दो हिस्सों में बांटते हुए बिलासपुर ग्रामीण संगठन जिला का गठन किया गया, जिसमें कोटा, बेलतरा और मस्तूरी विधानसभा को शामिल किया गया। लेकिन पदों के बंटवारे में तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती नजर आई।

तीन विधानसभा वाले भाजपा के इस नए संगठन जिले में जिला अध्यक्ष की कुर्सी कोटा विधानसभा के खाते में गई। अविभाजित बिलासपुर में महामंत्री रहे मोहित जायसवाल को जिला अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद मोर्चा–प्रकोष्ठों की सूची सामने आई, जिसमें भी कोटा और बेलतरा की झोली भरती दिखी, जबकि मस्तूरी उम्मीदों की गठरी थामे खड़ी रह गई।

कोटा-बेलतरा में कुर्सियों की बहार

भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रदीप कौशिक, अनुसूचित जाति मोर्चा से घनश्याम रात्रे, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के लखन पैकरा तीनों पद कोटा विधानसभा के खाते में चले गए। वहीं बेलतरा विधानसभा को भाजयुमो जिला अध्यक्ष ऋषभ चतुर्वेदी, किसान मोर्चा से धीरेंद्र दुबे और अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष मुशर्रफ खान का प्रतिनिधित्व मिला।

आखिरी उम्मीद भी टूटी

मस्तूरी विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ता इस आस में थे कि महिला मोर्चा का जिला अध्यक्ष पद शायद उनके हिस्से आ जाए, लेकिन शनिवार को प्रदेश से जारी सूची ने उनकी इस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया। महिला मोर्चा का पद भी कोटा विधानसभा के खाते में चला गया। इस तरह संगठन जिला के कुल 8 मोर्चा–प्रकोष्ठों के अध्यक्ष पद कोटा और बेलतरा में बंट गए, जबकि जिले की सबसे बड़ी विधानसभा मस्तूरी को एक भी अध्यक्ष पद नसीब नहीं हुआ।

सवाल कई, जवाब कोई नहीं

अब सवाल यह उठ रहा है कि, क्या मस्तूरी को भाजपा के विधायक नहीं होने का खामियाजा भुगतना पड़ा..? क्या लगातार नजरअंदाज किया जाना संगठनात्मक मजबूती के लिए सही संकेत है..? और क्या इसका असर आने वाले समय में पार्टी की जमीनी पकड़ पर पड़ेगा..? हालांकि इन तमाम सवालों पर भाजपा के किसी भी पदाधिकारी ने टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है। महिला मोर्चा की आखिरी उम्मीद भी कोटा को सौंपकर संगठन ने मानो मस्तूरी के अध्याय पर फिलहाल “The End” लिख दिया हो।

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