काग़ज़ों में प्रशासन की सख़्ती, खेतों में बेख़ौफ़ आग,पराली की लपटों में दम तोड़ता पर्यावरण, बेज़ुबानों का उजड़ता आशियाना.. आखरी जिम्मेदार कौन…?

कशिश न्यूज़ | बिलासपुर
जिले के गांवों में प्रशासन के सख़्त आदेश और नियम केवल काग़ज़ों तक सीमित नज़र आ रहे हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। खेतों में धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली न सिर्फ़ पर्यावरण के लिए ज़हर बन रही है, बल्कि बेज़ुबान पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं के जीवन पर भी भारी पड़ रही है। साथ ही मवेशियों का चारा भी छीन रही है।
खुलेआम जल रही पराली से उठता काला धुआँ पूरे इलाके के आसमान को ढक रहा है। हालात यह हैं कि प्रशासन की ढिलाई के चलते रोज़ाना खेतों में आग लगाई जा रही है, लेकिन रोकथाम के नाम पर कोई ठोस कार्रवाई नज़र नहीं आ रही। इस आग की लपटों में केवल फसल अवशेष ही नहीं जल रहे, बल्कि खेतों की मेड़ों पर लगे हरे-भरे पेड़-पौधे भी झुलस रहे हैं। सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आता है, जब आग की चपेट में आकर चिड़ियों के घोंसले जल जाते हैं। अपने आशियाने और अंडों को बचाने में असमर्थ पक्षी जान बचाकर आसमान में भटकने को मजबूर हैं।

पराली जलाने की यह लापरवाही पर्यावरण संतुलन को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। सवाल साफ़ है,क्या प्रशासन की सख़्ती सिर्फ़ फाइलों तक सीमित रह जाएगी, या ज़मीन पर भी इसका असर दिखाई देगा..?

अब ज़रूरत है सख़्त निगरानी, त्वरित कार्रवाई और जागरूकता की, ताकि खेतों की आग में भविष्य और प्रकृति यूँ ही न जलती रहे।



