टेक्नोलॉजी

जिले की यह सड़क है राहगीरों के लिए “सरप्राइज ट्रैक” महज़ 12 KM में 14 स्पीड ब्रेकर, हिचकोलों से हिचकोलों का स्वागत…@

स्पीड कंट्रोल या स्पाइन ब्रेक…?

कशिश न्यूज़ | बिलासपुर

सीपत क्षेत्रवासियों को वर्ष 2025 में भले ही सड़क, स्वास्थ्य या रोजगार जैसी मामूली सुविधाएं नसीब न हुई हों, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने एक ऐतिहासिक सौगात ज़रूर दे दी है। यह सौगात है,हर डेढ़ किलोमीटर में एक स्पीड ब्रेकर, वो भी बिना किसी पूर्व सूचना।

सीपत से मोपका के चिल्हाटी मोड़ तक महज़ 12 किलोमीटर की दूरी में 14 स्पीड ब्रेकर बनाकर लोक निर्माण विभाग ने यह साबित कर दिया है कि यहां सड़कें चलने के लिए नहीं, सहन करने के लिए बनाई जाती हैं।
इन्हें भले ही ज़ेबरा क्रॉसिंग कहा गया हो, लेकिन हकीकत यह है कि ज़ेबरा भी इन्हें देखकर पहचानने से इंकार कर दे।
न व्हाइट पेंट, न ब्लैक स्ट्राइप, न रिफ्लेक्टर, न कोई सांकेतिक बोर्ड मानो सब कुछ जनता के अंदाज़े पर छोड़ दिया गया हो।

रात में सड़क नहीं, सरकारी ‘सरप्राइज़ पैकेज’

रात के अंधेरे में यह ब्रेकर नहीं, बल्कि अचानक उभरने वाली सरकारी बाधाएं बन जाते हैं। जब तक वाहन चालक यह तय करे कि आगे सड़क है, गड्ढा है या ब्रेकर तब तक झटका लग चुका होता है। इसी वजह से इस मार्ग पर दुर्घटनाएं अब अपवाद नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की हकीकत बन चुकी हैं। लेकिन लगता है विभाग इसे भी किसी फील्ड टेस्ट का हिस्सा मानकर संतुष्ट है।

हर मोड़ पर ब्रेकर, हर सफर में परीक्षा

मोपका के चिल्हाटी मोड़, लगरा, फरहदा मोड़, पंधी बस स्टैंड, मटियारी, जांजी बस स्टैंड और सीपत के नवाडीह चौक। हर जगह इतने ब्रेकर हैं कि स्थानीय लोगों को लगने लगा है मानो वे वाहन नहीं, बैलगाड़ी चला रहे हों। यात्रा अब सफर नहीं, बल्कि रीढ़ और सस्पेंशन की संयुक्त परीक्षा बन चुकी है।

सुरक्षा या सज़ा…?

अगर यह सब सुरक्षा के नाम पर किया गया है, तो सवाल उठना लाज़मी है की संकेत बोर्ड कहां हैं…? पेंटिंग कहां है…? मानक कहां हैं…? या फिर यह मान लिया गया है कि जनता खुद अंदाज़ा लगाए, दुर्घटना से सबक सीखे और आगे बढ़ जाए। आज सीपत की सड़कें खुद सवाल पूछ रही हैं की यह विकास है या ब्रेकरों के ज़रिए जनता की सहनशक्ति की परीक्षा…? और लोगो के सवाल पर विभाग का वही पुराना, रटा-रटाया जवाब देखते है, कुछ करते है।

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