पुश्तैनी ज़मीन पर जबरिया कब्ज़ा और फर्जी बिक्री, अब कोलवाशरी के खिलाफ़ और भड़का जन आक्रोश.. @

कशिश न्यूज़ | सीपत
एनटीपीसी सीपत के आश्रित ग्राम भिलाई में प्रस्तावित अरपा कोल बिनीफिकेशन ग्रीन फील्ड लिमिटेड कोलवाशरी का विरोध अब और तेज़ हो गया है। 25 अगस्त को हुई जनसुनवाई में ग्रामीणों ने कोलवाशरी का विरोध दर्ज कराया था, वहीं अब पुश्तैनी ज़मीन पर जबरिया कब्ज़ा और फर्जी बिक्री का संगीन मामला सामने आया है।
ग्राम भिलाई निवासी घुरऊ लोहार पिता रामसिंह ने गुरुवार को बिलासपुर कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर बड़ा खुलासा किया है। उनका आरोप है कि उनकी पुश्तैनी ज़मीन खसरा नंबर 103 और 213, कुल रकबा 4.48 एकड़ पर अवैध कब्ज़ा कर उसे अरपा कोल बिनीफिकेशन ग्रीन फील्ड लिमिटेड कोलवाशरी के संचालक विनोद मित्तल को बेच दिया गया।

घुरऊ लोहार का कहना है कि यह भूमि उनके दादा पदुमनाथ के नाम दर्ज थी। दादा की मृत्यु 50 साल पहले हो गई थी। बाद में पिता रामसिंह ने रोज़गार की तलाश में बाहर जाते समय यह ज़मीन अस्थायी तौर पर दर्शन सिंह सरदार के पास गिरवी रखी थी। इसी बीच पिता रामसिंह की भी मौत हो गई।

शिकायत के अनुसार, दर्शन सिंह सरदार ने इस ज़मीन पर कब्ज़ा कर खेती शुरू कर दी। दो दशक पहले उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र देवेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सरदार सहित अन्य पुत्रों ने मिलकर कथित फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर ज़मीन अपने नाम करा ली और बाद में इसे विनोद मित्तल को बेच डाला। आवेदक घुरऊ लोहार का साफ़ कहा है, की न तो हमने कभी ज़मीन बेची और न ही कोई हस्ताक्षर या सहमति दी। हमारी पुश्तैनी संपत्ति को जालसाज़ी कर हड़प लिया गया है।
पीड़ित घुरऊ ने पूरे मामले की जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और ज़मीन को अपने नाम दर्ज कराने की माँग की है। इसके लिए उन्होंने शिकायत की प्रतियाँ राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और संभागायुक्त तक भेज दी हैं।
ग्रामवासियों का कहना है कि कोलवाशरी के नाम पर न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि अब किसानों की ज़मीन की खुली लूट भी हो रही है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या उद्योग के नाम पर किसानों की पुश्तैनी ज़मीन छीन ली जाएगी…?
खैरा स्टेडियम के जनसुनवाई में उठी ग्रामीणों की आवाज़ अब जबरिया कब्ज़े और जालसाज़ी के आरोपों के साथ और भी धारदार हो गई है। कोलवाशरी विरोध की आग अब शासन-प्रशासन के दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।