बिलासपुर

नवरात्रि में श्रीमद देवी भागवत कथा श्रवण, मोक्ष प्राप्ति का साधन है- छाया दुबे

(झलमला में कथा के सातवें दिन गंगा की उत्पत्ति, नवरात्रि की महिमा और तुलसी-नारायण विवाह के प्रसंग सुनाएं)

@ रियाज़ अशरफी

ग्राम झलमला में साहू परिवार के निवास में आयोजित संगीतमय श्रीमद देवी भागवत कथा में कथा वाचिका पूज्या किशोरी छाया दुबे ने 7 वें दिन श्रोताओं को गंगा की उत्पत्ति, नवरात्रि की महिमा और तुलसी-नारायण विवाह के प्रसंग सुनाएं। उन्होंने बताया कि नवरात्रि में श्रीमद्देवी भागवत कथा सुनने का विशेष महत्व है. नवरात्रि में 9 दिन तक इसका श्रवण- अनुष्ठान करने पर मनुष्य सभी पुण्य कर्मों से अधिक फल पा लेते हैं, इसलिए इसे नवाह यज्ञ भी कहा गया है, जिसका उल्लेख देवी भागवत पुराण में खुद भगवान शंकर व सूतजी ने किया है. जिन्होंने कहा है कि जो दूषित विचार वाले पापी, मूर्ख, मित्र द्रोही, वेद व पर निंदा करने वाले, हिंसक और नास्तिक हैं, वे भी इस नवाह यज्ञ से भुक्ति और मुक्ति को प्राप्त कर लेते हैं।

कथा वाचिका किशोरी छाया दुबे

श्रीमद्देवी भागवत कथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह सर्वोत्तम साधन है. देवी भागवत पुराण के अनुसार जो पुरुष देवी भागवत के 1 श्लोक का भी भक्ति भाव से नित्य पाठ करता है, उस पर देवी प्रसन्न होती हैं. महामारी व भूत प्रेत बाधा मिट जाती है. पुत्र हीन पुत्रवान, गरीब धनवान और रोगी आरोग्य वान हो जाता है. इसका पाठ करने वाला यदि ब्राह्मण हो तो प्रकांड विद्वान, क्षत्रिय हो तो महान शूरवीर, वैश्य हो तो प्रचुर धनाढ्य और शूद्र हो तो अपने कुल में सर्वोत्तम हो जाता है.

कथा श्रवण करने उमड़ रही है भक्तों की भीड़

कथा वाचिका छाया दुबे ने तुलसी-नारायण विवाह का प्रसंग में बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार प्राचीन काल में जलंधर नामक राक्षस ने चारों ओर बड़ा उत्पात मचा रखा था। वह बड़ा वीर और पराक्रमी था, उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म, उसी के प्रभाव से वह विजयी बना हुआ था। जलंधर के उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान विष्णु के पास गए और रक्षा की गुहार लगाई। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया। यह कहकर वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई। जिस जगह वृंदा सती हुई वहां तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। विष्णु ने कहा, हे वृंदा, यह तुम्हारे सतीत्व का फल है कि तुम तुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी। जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा, वह परम धाम को प्राप्त होगा। बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का ही प्रतीकात्मक विवाह माना गया है।

लीला पात्र के कलाकार

कथा में जनपद उपाध्यक्ष विक्रम सिंह,पप्पू साहू,मनोहर लाल साहू शत्रुघ्न साहू,भरत साहू, सुनील साहू अनिल साहू, पुरुषोत्तम साहू, कल्याणी साहू, रामसनेही साहू, जय शंकर लालू साहू,लतेल राम यादव, गोरे लाल सिदार, दुर्गा श्रीवास सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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