शिक्षा

अव्यवस्था: गिरने के कगार पर प्राथमिक स्कूल भवन की छत, फिर भी पढ़ाई कर रहे 115 विद्यार्थी..@

(शासकीय प्राथमिक शाला झलमला में 5 शिक्षक की जरूरत वर्तमान में सिर्फ 2 है)

(रियाज़ अशरफी): शासकीय प्राथमिक शाला झलमला की स्थिति खस्ताहाल है। स्कूल भवन का छत कब भरभराकर गिर जाए पता नही यहां पढ़ने वाले नौनिहालों की जिंदगी खतरे में है स्कूल भवन के अलावा शिक्षकों की भी कमी है। शासन को कई बार इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक इस ओर कोई पहल नहीं की गई है।

स्कूल का प्राचार्य कक्ष

बता दें कि सीपत तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत झलमला में 48 वर्ष पहले बनी खपरैल स्कूल अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। छत में लगी लकडियां जगह-जगह से टूट रही है। आलम यह है कि यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूल में पहली से लेकर कक्षा पांचवी तक कुल 115 बच्चे अध्ययनरत है। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए 4 शिक्षक व एक हेडमास्टर की जरूरत है, लेकिन स्कूल में सिर्फ दो सहायक शिक्षक है। 31 जुलाई को प्रधानपाठक मुंशीराम सिदार के सेवानिवृत्त होने के बाद से उनका पद भी खाली है।

स्कूल का दरवाजा

खुशबू, नूतन और आशा संभालती है टीचर की जिम्मेदारी

स्कूल में शिक्षकों की कमी को देखते हुए पड़ोस में रहने वाली खुशबू साह, नुतन साहू व कुमारी आशा सिदार ने रोजाना स्कूल जाकर बिना शुल्क के बच्चों को पढ़ाती हैं। इनके आने से कुछ हद तक समस्याएं कम हुई है लेकिन यह समस्याओं का समाधान नही है

भवन डिस्मेंटल के लिए स्कूल प्रबंधन विकास समिति ने प्रस्ताव किया था पारित

स्कूल के सहायक शिक्षक सतीश कुमार साहू ने बताया कि इस वर्ष फरवरी माह में स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए शाला प्रबंधन विकास समिति बैठक आयोजित कर भवन को तोड़ने और दो अतिरिक्त कक्ष की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया था। लेकिन अभी तक इन दोनों प्रस्ताव पर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस वजह से शिक्षक व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मरम्मत के लिए साढ़े तीन लाख रुपए हुए थे स्वीकृत

प्राथमिक शाला भवन के मरम्मत के लिए दो साल पहले शासन की ओर से 3 लाख 50 हजार की राशि पंचायत को जारी की गई थी, लेकिन अभी तक कार्य शुरू भी नहीं किया गया। इसकी एक वजह यह भी है कि पुरानी बिल्डिंग को डिस्मेंटल के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है, ऐसे में अगर स्कूल की मरम्मत की जाएगी तो शासन के पैसों की बर्बाद होगी।

बारिश के दिनों में होता है जल भराव की स्थिति

अभिभावकों ने बताया कि प्राथमिक स्कूल की स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है। स्कूल का निर्माण 48 साल पहले किया गया था। भवन को डिस्मेंटल करने का प्रस्ताव पारित किया गया है, लेकिन अभी तक इस ओर कोई पहल नहीं किया गया है। साथ ही स्कूल भवन की मरम्मत भी नहीं की गई है। बारिश के दिनों में स्कूल में जल भराव की समस्या होती है।

झलमला ही नहीं, ब्लॉक के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी: मस्तूरी बीईओ

बीईओ मस्तूरी अश्विनी कुमार भारद्वाज ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति के विषय मे कुछ बोल नहीं पाऊंगा। एक झलमला ही नहीं ब्लॉक के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को मूल स्थान में भेम जा रहा है। दो ही शिक्षकों से काम चलाना पड़ेगा।

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