कांग्रेस के “नंद” हुए भाजपा के “कुमार”…एक दिन पहले ही कहा था बीजेपी को अलविदा …. भूपेश ने कहा एक सच्चे आदिवासी नेता है साय….?

रायपुर। पूर्व सांसद और आदिवासी नेता अब कांग्रेस के नंद हो गए है। साय ने एक दिन पहले ही रविवार को भाजपा को अलविदा कहा था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने साय को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। इस दौरान राजीव भवन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,वन मंत्री मोहम्मद अकबर,प्रेमसाय सिंह टेकाम,अनिला भेड़िया, सत्यनारायण शर्मा समेत कांग्रेस के कई नेता मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, आज अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस है। जिन्होंने गरीबों और आदिवासियों के लिए संघर्ष किया। ऐसे नंद कुमार ने आज कांग्रेस सी सदस्यता ली है। इसके लिए उन्हें बधाई देता हूं। वह एक सच्चे आदिवासी नेता हैं।
भूपेश बघेल ने आगे कहा, नंदकुमार साय का जीवन सादगी भरा है। वे अनाज तो खाते हैं लेकिन नमक नहीं खाते। पूरा जीवन आदिवासियों की सेवा के लिए संघर्ष किया। गरीबों के लिए लड़ते रहे। हमारी सरकार बनने के बाद आदिवासियों के हित में लिए गए निर्णय पर सार्वजनिक रूप से हमारे कामों की प्रशंसा करते रहे हैं।

भूपेश बघेल ने कहा, नंदकुमार साय के कांग्रेस में शामिल होने की बातचीत पहले से चल रही थी। लेकिन कल रात में नंद कुमार साय ने कांग्रेस में शामिल होने का मन बनाया, और प्रदेश प्रभारी कुमारी सेलजा को इस संदर्भ में पत्र भेजा। जिसके बाद कुमारी सेलजा ने ये जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दी। फिर उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश की अनुमति दी। जिसके बाद पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने सदस्यता दिलाई।
सदस्यता लेने के बाद नंदकुमार साय ने क्या कुछ कहा, 5 पॉइंट में पढ़िए..
- ये निर्णय जीवन का बहुत कठिन निर्णय है। जनसंघ के समय से मैं और मेरे परिवार के लोग बीजेपी में रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे लोगों के साथ रहा हूं। अटल जी को फॉलो करता था।
- अटल, आडवाणी के दौर की जो बीजेपी पार्टी थी। वो पार्टी अब उस रूप में नहीं है। परिस्थितियां बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में छोटे गांव और कस्बे थे। भूपेश सरकार के काम पर मैंने स्टडी की है। छोटे गांव और कस्बे अब शहर बन गए।
- हम कहते थे देशभर का नाता है, गौ हमारी माता है। लेकिन सीएम भूपेश बघेल ने इसे एक नया स्वरूप दिया है। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना जनता के लिए कारगर साबित हुई है। मुझे अच्छा लगा भूपेश सरकार ने राम वनगमन पथ को बनाया।
- आज की तारीख में मैं बीजेपी में किसी पद पर नहीं था। मैं एक सामान्य कार्यकर्ता था। भले ही पार्टी में पद नहीं मिलता, लेकिन काम कैसे किया जा सकता है। ये तो पूछा जा सकता था।
- भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस अच्छा काम कर रही है। दल महत्व नहीं है, आम जनता से लिए काम करना है। मिलकर काम करेंगे तो छत्तीसगढ़ अच्छा होगा।
आज सुबह क्या हुआ जानिए…
बीजेपी के सीनियर नेता विष्णु देव साय और संगठन महामंत्री पवन साय समेत कुछ और नेता नंदकुमार साय के निवास पहुंचकर उनसे मुलाकात करने का प्रयास किया। लेकिन उन्हें जानकारी दी गई कि वह दिल्ली में हैं। जब उनसे फोन से संपर्क करवाने को कहा गया तो कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। निवास पर नंद कुमार साय के बेटे से मुलाकात हुई, और फिर बीजेपी नेता लौट गए।
अब जानते हैं साय ने अपने इस्तीफे में क्या लिखा है….
मुझ पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मेरी गरिमा को लगातार ठेस पहुंचाई जा रही है, जिससे मैं आहत महसूस कर रहा हूं। उन्होंने अपना इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह करते हुए कहा था कि बहुत गहराई से विचार करने के बाद मैंने बीजेपी में अपने सभी पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया।
1989, 1996 और 2004 में रायगढ़ से लोकसभा सदस्य और 2009 और 2010 में राज्यसभा सदस्य चुने गए। साय 2003-05 तक छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष और 1997 से 2000 तक मध्य प्रदेश भाजपा प्रमुख रहे। नवंबर 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वे छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के पहले नेता बने। साय 2017 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के अध्यक्ष बने ।
इस्तीफे से जुड़ी और भी खबरें पढ़िए…
नंदकुमार साय …. प्रदेश में आदिवासी नेता के रूप में ये नाम इज्जत से लिया जाता रहा। विधायक, सांसद और प्रदेश के पहले नेता प्रतिपक्ष रहे। बाद में धीरे-धीरे इनके अपनों ने ही इनका कद कम करना शुरू किया। राजनीति में सिर्फ इज्जत ही काफी नहीं, पद मायने रखता है। पिछले लंबे वक्त से पद के मामले में नंदकुमार साय भाजपा में उपेक्षित चल रहे थे। इनके अपने ही संगठन के नेताओं ने इनसे किनारा किया और धीरे-धीरे हालात इतने खराब हुए कि साय को अब भाजपा से इस्तीफा देना पड़ा।