कोलवाशरी के खिलाफ खैरा में आज जनसुनवाई, गुस्साए ग्रामीणों की हुंकार,स्वच्छ हवा और पानी चाहिए, कोल की कालिख नहीं…@

मस्तूरी ब्लॉक का खैरा विरोध में आज उबलने वाला है
कशिश न्यूज़| रियाज़ अशरफी
रलिया-भिलई में प्रस्तावित अरपा कोल बोनिफिकेशन ग्रीनफील्ड लिमिटेड की जनसुनवाई आज जयरामनगर-खैरा स्टेडियम में हो रही है और ग्रामीण इसे किसी भी हाल में स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। जिस विकास का झुनझुना कंपनी और प्रशासन बजा रहा है, उसे ग्रामीण “विनाश की घंटी” कह रहे हैं।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि बच्चों की सांसों का सौदा क्यों..?
कोलवाशरी के विरोध में खड़े लोगों का कहना है कि जहां प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है, वहां 500 मीटर के दायरे में स्कूल है। कोलवाशरी से उड़ने वाली कोयले की धूल बच्चों की सेहत पर सीधा असर करेगी। खेती-किसानी नाले-नहर पर निर्भर है,इस प्रोजेक्ट के स्थापित होने से वह भी खतरे में पड़ जाएगी। इतना ही नहीं, आसपास मौजूद धार्मिक स्थल राउतराय की पवित्रता भी धुएं और प्रदूषण में दब जाएगी।
जनसुनवाई या जनखरीदारी…?
गांवों में चर्चा यह भी है कि विरोध की धार को कुंद करने के लिए “लेन-देन” का खेल खूब चल रहा है। कुछ नेताओं और दलालों पर आरोप है कि वे जनता के हितों की बोली लगाकर कंपनी की थाली में परोसे जा रहे हैं। यही वजह है कि विरोध की आवाज और बुलंद हो गई है।
आसपास के कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने हाल ही में मोर्चा खोलते हुए जनसुनवाई रद्द करने और प्रोजेक्ट को स्थायी रूप से बंद करने की मांग की थी। उनका साफ कहना है,जहां बच्चों की सेहत और किसानों की जिंदगी दांव पर हो, वहां किसी भी उद्योग का कोई औचित्य नहीं है।
प्रशासन ने कसी कमर, जनता उबाल पर
जनसुनवाई को देखते हुए प्रशासन ने खैरा स्टेडियम को छावनी में बदल दिया है। पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। लेकिन प्रशासन की सख्ती से ग्रामीणों का गुस्सा कम नहीं हुआ है। गांव-गांव से जत्थे बनाकर लोग खैरा पहुंचने की तैयारी में लगे है। माहौल गरम है और टकराव की आशंका गहरा रही है। ग्रामीणों की एक ही मांग है की हमें स्वच्छ हवा और पानी चाहिए, रोजगार और विकास का नाम लेकर बीमारी नहीं।