लुतरा शरीफ बना कौमी एकता की मिसाल, विश्व आदिवासी दिवस पर मुस्लिम समाज ने शोभायात्रा का किया ऐतिहासिक स्वागत…@

जनप्रतिनिधियों ने कहा धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संगम से बना लुतरा शरीफ का यह दृश्य, भारत की साझी विरासत का एक स्वर्णिम अध्याय बन गया है।
कशिश न्यूज़ | बिलासपुर
विश्व आदिवासी दिवस के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत लुतरा शरीफ एकता, भाईचारे और सांझी तहज़ीब की जीवंत मिसाल बनकर उभरा। दरगाह हज़रत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाह अलैह के प्रांगण में मुस्लिम समाज ने आदिवासी समाज की पारंपरिक शोभायात्रा का न सिर्फ़ भव्य स्वागत किया, बल्कि गंगा-जमुनी संस्कृति की एक सुनहरी तस्वीर भी पेश की।

रैली में आदिवासी समाज के युवक युवती सहित महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों और रंग-बिरंगे झंडों के साथ शामिल हुए। जैसे ही शोभायात्रा दरगाह के पास पहुंची, मुस्लिम समाज ने आदिवासी समाज के वरिष्ठों का पीला गमछा से स्वागत किया, साथ ही सभी ठंडे जल और शीतल पेयों के साथ रैली का स्वागत किया। इस अद्भुत नज़ारे ने हर किसी का दिल जीत लिया।

इंतेजामिया कमेटी, दरगाह के खादिमों और स्थानीय सुन्नी मुस्लिम जमात के लोगो ने आदिवासी समाज के प्रमुखों का खुलकर इस्तकबाल किया। सभी ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि भारत की असली ताक़त उसकी विविधता और साझी संस्कृति में है। ग्रामीणों और दोनों समाजों के गणमान्यजनों ने इस आयोजन को सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन यह दर्शाता है कि अगर दिल मिलें तो धर्म, जाति और परंपराएं बाँटने का नहीं, बल्कि जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं।

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने मुस्लिम समाज के इस आदर और सम्मान के लिए आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, यह स्वागत सिर्फ़ हमारी रैली का नहीं, हमारी पूरी संस्कृति और अस्मिता का सम्मान है। और हमारे लिए यही सम्मान हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के दौर मे था, और अब देखने को मिला। समाज प्रमुखों ने कहा, यह आयोजन लुतरा शरीफ ही नहीं, पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन गया है। इस ऐतिहासिक समागम ने यह साबित कर दिया कि जब समाज के सभी वर्ग मिलकर एक मंच पर आते हैं, तो कौमी एकता की वह रोशनी फैलती है जो आने वाली नस्लों को राह दिखाती है।
