एनटीपीसी की ‘ईको-हाउस’ पहल: ग्रामीण आवास को मिलेगी नई गति, पर्यावरण की भी होगी सुरक्षा

कशिश न्यूज| सीपत
भारत की अग्रणी ऊर्जा कंपनी एनटीपीसी ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने किफायती राखड़-आधारित “ईको-हाउस” को लॉन्च कर ग्रामीण आवास के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस नवोन्मेषी पहल से न केवल ग्रामीण आवास को नई दिशा मिलेगी, बल्कि यह पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित आईआईटीएफ 2024 में इस घर को मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद, एनटीपीसी ने इसे आम जनता के लिए खरीदने हेतु उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।

कृष्णा यादव को सौंपा गया पहला इको-हाउस
सीपत निवासी कृष्ण यादव को यह पहला इको-हाउस औपचारिक रूप से सौंपा गया। इस अवसर पर एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप्त कुमार मिश्रा (क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक, पश्चिम क्षेत्र-II एवं राखड़ – नई पहल), अजय कुमार शुक्ला (कार्यकारी निदेशक, राखड़ – नई पहल), विजय कृष्ण पांडेय (परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी सीपत) सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा यह घर न केवल सतत जीवनशैली का प्रतीक है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
इको-हाउस का पर्यावरणीय लाभ
एनटीपीसी की शून्य-कार्बन उत्सर्जन और सतत विकास की प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर इको-हाउस की संकल्पना विकसित की गई। इसमें एनटीपीसी के विद्युत संयंत्रों से प्राप्त 80% राखड़ और राखड़-आधारित उत्पादों का उपयोग किया गया है। यह पहल न केवल अपशिष्ट प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती का समाधान है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री को बढ़ावा देती है। इको-हाउस की मजबूत इंटरलॉकिंग वॉल ब्लॉक्स तकनीक के द्वारा यह बिना रेत, सीमेंट, स्टील, प्लास्टर और गारे के सटीक रूप से जुड़कर उत्कृष्ट संरचनात्मक मजबूती प्रदान करता है, जिससे लागत और निर्माण समय दोनों में काफी कमी आती है।
कार्बन उत्सर्जन में कमी और लचीलापन
इको-हाउस पारंपरिक रूप से निर्मित घरों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में लगभग 75% की कमी लाता है। इसका एक अतिरिक्त लाभ यह है कि इसे कम से कम नुकसान या क्षति के साथ तोड़ा और फिर से खड़ा किया जा सकता है, जिससे भविष्य में जरूरतों के हिसाब से लचीलापन मिलता है।
विस्तारित उत्पादन और ग्रामीण समुदायों के लिए हरित भविष्य
एनटीपीसी की योजना इन राखड़-आधारित घरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर देशभर में उपलब्ध करवाने की है। यह पहल भारत के ग्रामीण आवास परिदृश्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह सस्ता, टिकाऊ और तेजी से तैयार होने वाला समाधान है, जो न केवल आम जनता का घर बनाने का सपना साकार करता है, बल्कि पर्यावरण-संरक्षण के लक्ष्य को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ाता है। जब इन इको-हाउस को सौर रूफटॉप से जोड़कर ग्रिड से जोड़ा जाएगा, तब ये वास्तव में ग्रामीण समुदायों के लिए एक हरित और सतत भविष्य की ओर अग्रसर होंगे।